चीन ने कभी आतंकवाद की पीडा वैसी नहीं झेली जैसी भारत या अन्य देशों ने झेली है इसलिए उसे इस दर्द का अहसास नहीं है। लोकतंत्र और मानवाधिकारों में यकीन नहीं रखने वाला चीन पीठ में छुरा घोंपने वाला देश बन गया है ।चीन ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने की राह में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तकनीकी रोक लगाकर साफ कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ जब लड़ाई में पूरा विश्व एकजुट होकर खड़ा है ऐसे में वह आतंकवादी देश पाकिस्तान और वहां के आतंकवादियों के साथ खड़ा है। चीन ने कभी आतंकवाद की पीड़ा वैसी नहीं झेली जैसी भारत या अन्य देशों ने झेली है इसलिए उसे इस दर्द का अहसास नहीं है। लोकतंत्र और मानवाधिकारों में यकीन नहीं रखने वाला चीन पीठ में छुरा घोंपने वाला देश बन गया है ।चीन को अब इस बात की परवाह नहीं कि दुनिया उसके बारे में क्या सोचेगी। संयुक्त राष्ट हो या कोई और अंतरराष्ट्रीय संस्था, चीन वहां अपनी दादागिरी तो बनाये रखना चाहता है लेकिन इन संस्थाओं का कोई फैसला अगर उस पर लागू करने की बात आये या उसे वह अपने हित में नहीं लगे तो उसके विरोध में उतर जाता है। कौन भूला है दक्षिण चीन सागर पर अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण का जुलाई 2016 में आया वह फैसला, तब न्यायाधिकरण ने दक्षिण चीन सागर पर सिर्फ चीन के अधिकार को नहीं माना था। उसने सागर के एक हिस्से पर फिलीपींस के दावे की पुष्टि की थी लेकिन चीन की हेकड़ी देखिये कि उसने तब अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के इस फैसले को मानने से न सिर्फ इन्कार कर दिया था बल्कि संप्रभुता की रक्षा के लिए सेना तैयार होने की धमकी भी दे डाली थीअब जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के मामले में ही देखिये भारत सहित पूरी दुनिया दस सालों से कोशिश कर रही है कि इसे वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जाये लेकिन चीन मांग रहा है सुबूत। 2009 में 26/ सरगना की भूमिका को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव लाया गया कि अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जाये। उस प्रस्ताव को 13 देशों ने समर्थन दिया लेकिन चीन ने लगा दिया वीटो क्योंकि उसे चाहिए सुबूत। शायद उसे मुंबई हमलों की वह भयावह तसवीरें नहीं दिखाई दीं जहां निर्दोषों की लाशें बिखरी हुई थीं। शायद उसे पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलरों की वह वॉइस कॉल्स नहीं सुनाई दी जिसमें वह आतंकवादियों को निर्देश देते सुनाई दे रहे थे, शायद उसे डेविड हेडली की उन गवाहियों पर भरोसा नहीं जो उसने अमेरकी अदालतों में दी मसूद अजहर पर प्रतिबंध का प्रस्ताव 2016 में भी आया। पठानकोट वायुसेना हवाई अड्डे पर हुए हमले के मास्टरमाइंड अजहर के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में लाये गये प्रस्ताव को 14 वोट मिले लेकिन चीन ने 2016 के मार्च और अक्तूबर में दो बार इस प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी क्योंकि उसे चाहिए थे सुबूत । 2017 में पी-3 देश खुद अजहर मसूद के खिलाफ प्रस्ताव लेकर आये क्योंकि जम्मू-कश्मीर के उरी में सैन्य शिविर पर हुए आतंकी हमले के पीछे जैश सरगना मसूद अजहर का ही हाथ था। पी-3 देशों के इस प्रस्ताव का अमेरिका, ब्रिटन आर फास न खुलकर समथन किया लेकिन चीन ने इस प्रस्ताव पर आम सहमति न होने का तर्क पेश करते हुए विरोध कर दिया क्योंकि उसे एक बार फिर चाहिए थे सुबूत 14 फरवरी, 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ की बस पर हुए आतंकी हमले में हमारे 40 जवान शहीद हो गये। इस हमले के पीछे भी जैश सरगना मसूद अजहर ही था। दुख के समय जब पूरा विश्व भारत के साथ खड़ा था तब चीन इसी उधेड़बुन में लगा था कि पाकिस्तान को कैसे बचाया जाये। मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के लिए इस बार खुद अमेरिका, ब्रिटेन और फांस ने पहल की और संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव लेकर आये । इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए और आपत्ति दर्ज कराने के लिए 10 दिन का समय मिला। लेकिन चीन के लिए यह 10 दिन कम थे क्योंकि उसे इस प्रस्ताव को समझने के लिए और वक्त चाहिए इसलिए उसने तकनीकी रोक लगा दी। तकनीकी रोक का अर्थ है संबंधित देश किसी प्रस्ताव पर विचार करने के लिए और समय चाहता । इसकी अवधि अधिकतम नौ माह होती है। तो इस तरह चीन को 2009 में भी चाहिए थे सबत. 2016 में भी चाहिए थे सबत. 2017 में भी चाहिए थे सबत और 2019 में भी चाहिए सबत। चीन समझ नहीं रहा है वो आग से खेल रहा है। ये वही आग है जिसे पाकिस्तान भी कभी-कभी झेलता । भस्मासर को पालोगे तो खद भी मिट जाओगे। मसूद अजहर को बचा कर चीन भले खुश हो रहा हो लेकिन उसका चेहरा अब परी दनिया के समक्ष उजागर हो चुका है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के राजनयिकों ने चीन को चेतावनी दी है कि यदि वह मसद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के मार्ग को बाधित करना जारी रखता है तो जिम्मेदार सदस्य देश सरक्षा परिषद में अन्य कदम उठाने पर मजबर हो सकते हैं। दसरी ओर अमेरिका का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता तथा शांति हासिल करने के मामले में उसके चीन के साथ साझा हित , लेकिन जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसद अजहर को वैश्विक आतंकवादी नामित करने में विफलता इस लक्ष्य को हासिल करने में बाधक है। फ्रांस ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगा दिया है और उसकी संपत्तियों को जब्त करने का ऐलान भी कर दिया है। दरअसल चीन का ष्टक्वश्वष्ट प्रोजेक्ट गिलगितबाल्टिस्तान क्षेत्र से होता हआ वश्य और पाकिस्तान के मानसेहरा से भी गुजरता है। यह इलाका खैबर पख्तुनख्वा में पड़ता है और यह वही राज्य है जहां बालाकोट स्थित है। बालाकोट में ही जैश-एमोहम्मद के ट्रेनिंग कैम्प पर भारतीय वायुसेना ने स्ट्राइक कर उसे उड़ा दिया था। ष्टक्श्वष्ट प्रोजेक्ट पर चीन के लगभग 12 हजार नागरिक काम कर रहे हैं और चीन को इस बात का भय है कि यदि उसने मसूद अजहर का साथ नहीं दिया तो उस इलाके में प्रभावी जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी कहीं उसके प्रोजेक्ट को या वहां काम कर रहे उसके कर्मचारियों को नुकसान न पहँचा दें।अब मसद अजहर पर हो रही घेरलू राजनीति की भी चर्चा कर लेते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहल गांधी ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के खिलाफ कछ नहीं बोल रहे हैं क्योंकि वह चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से %डरे% हए हैं। उनके इस आरोप के बाद भाजपा ने पलटवार करते हए कहा कि भारत को जब भी पीड़ा होती है तो राहल क्यों %खुश% होते हैं ?