पन्द्रह दिन पहले बुझेन में सुषमा स्वराज चीनी विदेशमंत्री वांग यी से मिली थीं। 27 फरवरी 2019 को रूस, चीन और भारतीय विदेशमंत्रियों ने बैठक कर 'मैच्योर डिप्लोमेसी' करने का संकल्प किया था। यह बैठक पुलवामा हमले के बाद हुई थी। यहां क्षेत्रीय शांति व विकास के वास्ते आपसी संवाद को सबसे कारगर उपाय के रूप में इस्तेमाल करने पर सहमति बनी थी। बैठक में आतंकवाद को निपटाने के लिए समन्वय बनाये रखने का संकल्प किया गया थाये दिखाने के दांत थे वास्तविक तस्वीर से परा देश बधवार देर रात रूबरू हो रहा था। उससे ठीक पहले, संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को आतंकी घोषित किये जाने के प्रस्ताव पर चीन क्या करेगा, एक सस्पेंस बना हुआ था। उस सस्पेंस से पर्दा रात 12.30 बजे उठ ही गया। खबर आई, 'जैश सरगना के समर्थन में चीन का वीटो।' तो, ये है चीन का असल चेहरा । क्या यही था बझेन का संकल्प? बात आपसी संवाद की करते हैं और वीटो के वास्ते सस्पेंस बनाकर रखते हैं।क्या कहें इसे? पुलवामा में जो कुछ हुआ, उसमें चीन की हामी थी? हमारे विदेश मंत्रालय को ऐसा कहने में संकोच है। पाकिस्तान की वस्तुओं पर 200 फीसदी टैक्स लगाने वाले वित्तमंत्री अरुण जेटली चीनी माल पर कोई ऐसा टैक्स नहीं लगा पायेंगे। ढोंगी चीन को देखिये, पुलवामा कांड की निंदा की थी। उस हमले से चीन को 'गहरा सदमा' भी लगा था। मगर, हमले के जवाबदेह मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने में चीन का दोहरा चेहरा भी पूरी दुनिया ने देख लिया। यह प्रस्ताव फ्रांस का था, जिसका समर्थन अमेरिका, जर्मनी समेत तमाम देश कर रहे थे। चीन वीटो का दुरुपयोग बार-बार कैसे कर सकता है, उसके लिए यह प्रकरण उदाहरण के रूप में सबके सामने है।मसूद अजहर चीन की कमजोरी है या तुरूप का इक्का? 23 नवंबर 2018 को कराची के क्लिफटन एरिया स्थित चीनी कौंसुलेट पर आत्मघाती हमला हुआ था। यह वही जगह है, जहां दाऊद इब्राहिम को पाकिस्तान ने पनाह दे रखी है। चीनी वाणिज्य दूतावास पर हमले में सात लोग मारे गये थे, जिनमें तीन दहशतगर्द और दो पुलिस वाले शामिल थे। पाकिस्तान ने इसकी जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी पर डाल दी, और कहानी यह गढ़ी गई कि रॉ के लोगों ने ऐसा करने के लिए कहा था। उसके पीछे मंशा चीन-भारत के बीच अविश्वास को बढ़ाना था चीन, पाकिस्तानी अतिवादियों के समक्ष घुटने क्यों टेक देता है? उसकी दो बड़ी वजहें हैं। पहला कारण यह कि ये लोग शिन्चियांग में अलगाववाद को हवा न दें। दूसरी वजह, पाकिस्तान में कार्यरत पांच से छह लाख चीनी वर्करों की सुरक्षा है। अप्रैल 2015 में खबर आई कि पाकिस्तान ने चीनी कामगारों की रक्षा के वास्ते 12 हजार सुरक्षा बलों की एक यूनिट का गठन किया है, जो उनके काम करने की जगहों की चौकसी किया करेंगे। ग्वादर पोर्ट सिटी में पाकिस्तान एक ऐसी कॉलोनी के निर्माण में लगा हुआ है जहां पांच लाख चीनी वर्कर रह सकेंगे। 3 लाख 60 हजार वर्गफीट पर बन रही टाउनशिप के वास्ते चीन 15 करोड डॉलर पाकिस्तान को दे रहा है। ग्वादर के इस 'चाइना टाउन' को 2022 तक तैयार कर देना है।सितंबर 2018 में चीनी विदेशमंत्री वांग यी इस्लामाबाद आये। उस दौरे में चीनी कर्मियों की सुरक्षा की समीक्षा की गई। उसके बाद से चीनी कामगारों की रक्षा के वास्ते बनी यनिट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की संख्या बढाकर 15 हजार कर दी गई है। इस समय चाइना-पाक इंवेस्टमेंट कॉरपोरेशन (सीपीईसी) की 20 से अधिक परियोजनाओं पर काम चल रहा है। 'सीपीईसी' के प्रोजेक्ट में चीन के 27 अरब डॉलर लगे हुए हैं। ऐसे में चीन मसूद अजहर जैसों को नाराज कर परियोजनाओं की ऐसी-तैसी कराने का जोखिम क्यों लेगा?पाकिस्तान में जब से वन बेल्ट वन रोड परियोजना चल रही है, चीन के पचासों वर्कर, इंजीनियर मारे जा चके हैं
चीन की सरपरस्ती में आतंकी सरगना मसूद