यह कोई अप्रत्याशित नहीं था, सामरिक व आर्थिक हितों के नजरिये से चीन को पाक की जरूरत है। इसलिये संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने वाले प्रस्ताव को वीटो किया। उसने चौथी बार जैश-एमोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को अंतर्राष्टीय आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव को वीटो कियाजैसे चीन ने मामले को अंतिम समय तक लटकाये रखा और जिस तरह तकनीकी आधार बताकर प्रस्ताव को रोका, ?वह चीन की नीयत को दर्शाता है। घटनाक्रम के कई निष्कर्ष हमारे सामने हैं। पहला यह कि भले ही भारत वैश्विक सहयोग के तमाम मंचों पर चीन के साथ खड़ा हो मगर चीन भारत के मुकाबले पाक को तरजीह देगा। पाक न केवल उसका सामरिक सहयोगी है बल्कि चीन के साम्राज्यवादी मंसूबों को पूरा करने वाली 'वन बेल्ट, वन रोड' जैसी महत्वाकांक्षी योजना का साझीदार भी है। पाकिस्तान में कई विद्युत व बड़ी परियोजनाएं चीन के द्वारा पूरी की जा रही हैं। निसंदेह चीनी कर्मचारियों व अधिकारियों को आतंकवादियों से सुरक्षा दिलाने के लिये उसे पाक सरकार का साथ चाहिए। अन्यथा उसका अरबों डॉलर का निवेश खटाई में पड़ सकता है। इसके अलावा चीन को शिनजियांग प्रांत में उईगर चरमपंथियों से मुकाबले के लिये पाक की मदद की जरूरत होती है। चीन भविष्य के अफगानिस्तान में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका चाहता है और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिये उसे पाक की जरूरत होगी। चीन जानता है कि यदि उसने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करवा दिया तो सेना व आईएसआई समर्थित आतंकियों द्वारा उसके हितों पर तल्ख प्रतिक्रिया होनी स्वाभाविक है। बहरहाल, इस घटनाक्रम से चीन के आतंकवाद पर दोहरे मापदंड का तो खुलासा होता ही है वहीं संयुक्त राष्ट के औचित्य पर सवाल खड़ा होता है कि कैसे वीटो का अधिकार हासिल महाशक्तियां संकीर्ण हितों की पूर्ति के लिये विश्व जनमत को ताक पर रख देती हैं। ऐसे में अमेरिका, फ्रांस व ब्रिटेन समेत विश्व शक्तियों ने चीन को चेताते हुए वैकल्पिक उपायों के इस्तेमाल करने की बात कही है। भले ही चीन कूटनीतिक नजरिये से इसे अपनी सफलता बता रहा है मगर नैतिक रूप से यह चीन कीहार है। पुलवामा की घटना ज्यादा पुरानी नहीं है और चीन घटना की निंदा कर चुका है। ऐसे में संयुक्त राष्ट में मसूद अजहर के पक्ष में खड़ा होना, चीन को दुनिया के सामने बेनकाब करता है। बहरहाल, कूटनीतिक प्रयासों से भारत दुनिया को बताने में कामयाब रहा है कि पाकिस्तान की धरती से भारत के खिलाफ आतंकी हमले किये जा रहे हैं।
आतंकी को चीन का साथ